देहरादून। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशों और मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन के पूर्व में दिए गए आदेशों के क्रम में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में सड़क सुरक्षा जनजागरूकता अभियान के लिए विस्तृत एसओपी और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) उत्तराखंड की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यार्थियों में विद्यार्थी जीवन से ही सड़क सुरक्षा नियमों की समझ विकसित करना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार अभियान ‘सुरक्षित बचपन, सुरक्षित उत्तराखंड’ की थीम पर चलेगा। कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी आयु और कक्षा के स्तर के अनुसार सड़क सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी। प्राथमिक स्तर पर सड़क पार करने, फुटपाथ के इस्तेमाल, स्कूल बस में कतार और पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित चलने जैसे विषयों पर गतिविधियां होंगी। कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों को सीट बेल्ट, हेलमेट, साइकिल चलाने के नियम, गुड सेमेरिटन कानून और पहाड़ी सड़कों पर बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए मोटर व्हीकल एक्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, नाबालिगों द्वारा वाहन न चलाने, शराब पीकर वाहन न चलाने, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और हिल ड्राइविंग में लो गियर के महत्व पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे।
हर विद्यालय में सड़क सुरक्षा क्लब गठित किया जाएगा। इसमें प्रभारी शिक्षक, एक महिला शिक्षक, प्रत्येक कक्षा से दो विद्यार्थी, दो अभिभावक तथा जहां संभव हो स्थानीय ट्रैफिक पुलिस या होमगार्ड को शामिल किया जाएगा। क्लब की हर माह के पहले सोमवार को 30 मिनट की बैठक होगी। विद्यालय के मुख्य द्वार पर हेलमेट, सीट बेल्ट, जेब्रा क्रॉसिंग और पहाड़ी मोड़ों से संबंधित सड़क सुरक्षा संदेशों के मॉडल लगाने के भी निर्देश हैं।
एसओपी में पूरे वर्ष की गतिविधियों का कैलेंडर भी तय किया गया है। अप्रैल में सड़क सुरक्षा क्लब गठन और शपथ ग्रहण, जुलाई में बरसात व भूस्खलन से बचाव कार्यशाला, अगस्त में सड़क सुरक्षा रैली, नवंबर में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत चित्रकला व निबंध प्रतियोगिता, जनवरी में कोहरा सुरक्षा अभियान तथा फरवरी में ‘मॉक ड्रिल’ के माध्यम से दुर्घटना की स्थिति में बचाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को माह की पांच तारीख तक फोटो सहित रिपोर्ट बीईओ कार्यालय को भेजनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारी इसकी मासिक समीक्षा करेंगे और उत्कृष्ट तीन विद्यालयों को जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा सम्मान दिया जाएगा।
एसओपी में आपात स्थिति में घायल को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, भीड़ न लगाने और एंबुलेंस को रास्ता देने की अपील के साथ पुलिस, 108 एंबुलेंस और 1033 एनएचएआई हेल्पलाइन की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्टेट कोऑर्डिनेटर सड़क सुरक्षा विनय थपलियाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन विद्यार्थी जीवन से ही शुरू कराया जाना जरूरी है। विद्यालय स्तर पर नियमित जागरूकता, प्रशिक्षण और सड़क सुरक्षा क्लबों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित यातायात व्यवहार के लिए तैयार किया जाएगा। इससे युवाओं को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने और प्रदेश में सुरक्षित यातायात व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

No comments:
Post a Comment