Monday, 24 August 2026

हाईस्कूल एवं इंटर कालेजों में कार्यरत एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध शुरू


हाईस्कूल एवं इंटर कालेजों में कार्यरत एलटी शिक्षकों के लिए शिक्षा निदेशक द्वारा जारी टीईटी करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया। इस बाबत आज राजकीय इंटर कालेज ढेला में मध्यांतर में राजकीय शिक्षक संघ की बैठक हुईं। इस दौरान पूर्व मंडलीय मंत्री नवेंदु मठपाल ने कहा 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अब टी ई टी करने का आदेश निर्गत करना दुर्भाग्यपूर्ण है।शिक्षकों की सेवा शर्तें बदल दी गईं। टीईटी-II एलटी के विषय-विशेष कार्य से मेल नहीं खाता। एलटी माध्यमिक संवर्ग है प्रारंभिक नहीं। 

अनुभवी शिक्षकों को अब नई परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है जबकि वे वर्षों से सफलतापूर्वक पढ़ा रहे हैं। बिना टीईटी के पदोन्नति और भविष्य की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। जिन शिक्षकों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा विभाग में अपनी योग्यता से शिक्षा व्यवस्था को संवारने में लगा दिया है, अचानक उनकी पात्रता का आंकलन एक वस्तुनिष्ठ परीक्षा के आधार पर करना और सेवा समाप्त करने की शर्त थोपना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि मानवाधिकारों का भी हनन है। पूर्व ब्लाक उपाध्यक्ष बालकृष्ण चंद ने कहा कि वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा को एक परीक्षा के नतीजे से जोड़कर एल टी शिक्षकों की आजीविका और सम्मान को संकट में डालना संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध है। एलटी संवर्ग पर टीईटी की बाध्यता मुख्य रूप से 2014 के नियमावली संशोधन और उसके बाद की व्याख्या का परिणाम है। यह न तो मूल सेवा नियमों के अनुरूप है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से न्यायसंगत। यदि कक्षा 6-8 की जिम्मेदारी एलटी पर थोपी गई थी तो उसके लिए अलग व्यवस्था या योग्यता तय की जानी चाहिए थी न कि पूरे कैडर को टीईटी-II के दायरे में लाकर अन्याय किया जाना। 

कर्मचारी शिक्षक संगठन के जिला उपाध्यक्ष सुभाष गोला ने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह 2014 से पूर्व नियुक्त एलटी शिक्षकों को इस बाध्यता से मुक्त रखे या कम से कम माध्यमिक स्तर की वास्तविकता और विशेष विषयों की अलग प्रकृति को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान निकाले।वक्ताओं का मत था कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से आरटीई अधिनियम के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 के शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य माना है। माध्यमिक स्तर कक्षा 9-10 के शिक्षकों पर यह आदेश स्वतः लागू नहीं होता। उत्तराखंड में 2014 के बाद एलटी कैडर को कक्षा 6-8 की जिम्मेदारी दी गई इसलिए विभाग अब पूरे एलटी संवर्ग पर टीईटी थोप रहा है। यह व्याख्या अत्यधिक विस्तृत और एकतरफा लगती है।

उत्तर प्रदेश में भी प्रशिक्षित स्नातक टीजीटी या एलटी सेवा नियमावली 1983 में मूल रूप से टीईटी अनिवार्य नहीं था। अप्रैल 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नई भर्ती के संदर्भ में टीईटी को अनिवार्य करने का निर्देश दिया लेकिन साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा कि चयनित शिक्षक केवल कक्षा 9 और 10 पढ़ाएंगे। यूपीपीएससी ने तदनुसार अधिसूचना में संशोधन कर यह साफ कर दिया कि एलटी या टीजीटी भर्ती कक्षा 9-10 के लिए है। इससे यह संदेश मिलता है कि माध्यमिक स्तर के शिक्षकों पर ऊपरी प्राथमिक 6-8 वाली योग्यता जबरदस्ती नहीं थोपी जानी चाहिए। उत्तराखंड में भी इसी तर्क को अपनाया जा सकता है। इस मौके पर मनोज जोशी, नवेंदु मठपाल, महेंद्र आर्य, शैलेंद्र भट्ट, दिनेश निखुरपा, जया बाफिला, उषा पवार, नरेश कुमार, संजीव कुमार, प्रदीप शर्मा, बालकृष्ण चंद वसुधा यादव मौजूद रहे।

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