Thursday, 30 March 2023

Uttarakhand: हरिद्वार पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह, बोले- अगली रामनवमी पर भव्य मंदिर में विराजमान होंगे भगवान राम


गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के 113वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगली रामनवमी पर प्रभु श्री राम अपने भव्य मंदिर के अंदर अयोध्या में विराजमान होंगे। इस दौरान उनके भाषण की शुरुआत भगवान श्री राम और अयोध्या में निर्माणाधीन मंदिर से करने पर पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।

अमित शाह ने देश की जनता को रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के जन्मदिन दिन पर छात्र-छात्राएं शिक्षार्थी का जीवन समाप्त करके दीक्षित होकर नए जीवन और समाज में जाने की शुरुआत करने जा रहे हैं। मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देना चाहता हूं। छात्र-छात्राओं को हमेशा गर्व रहेगा कि उनकी शिक्षा, दीक्षा और दीक्षांत तीनों गुरुकुल कांगड़ी जैसे महान संस्थान में हुआ है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश में एक नई वैचारिक क्रांति लाएगी। इसके माध्यम से क्लास लैस और स्ट्रीम लैस शिक्षा पद्धति को लागू किया जा जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत आने वाले दिनों में दस राज्यों में 20 मातृ भाषा में इंजीनियरिंग कॉलेज होंगे। जिसमें मध्य प्रदेश के एक कॉलेज में मेडिकल साइंस की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ढेर सारी परीक्षाएं भी मातृ भाषा में विद्यार्थी दे सकेंगे। इस प्रकार की व्यवस्था मोदी सरकार ने की है।

नई शिक्षा नीति में बच्चा हर स्तर पर एक्जिट और एंट्री कर सकता है

नई शिक्षा नीति में एक साल की पढ़ाई करेंगे तो सर्टिफिकेट मिलेगा, दो साल में डिप्लोमा और तीन साल में पढ़ाई करने पर डिग्री मिलेगी। चौथे साल में रिसर्च मिल जाएगा। नई शिक्षा नीति में बच्चा हर स्तर पर एक्जिट भी कर सकता है और एंट्री भी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि हमारे युवाओं एक प्लेटफार्म दिया जाए। जिसके माध्यम से विद्यार्थी मां भारती का गुणगान से पूरे विश्व में कर सकें।

प्रधानमंत्री ने देश की समस्याओं को चुटकी में समाप्त किया

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 2016 में 716 स्टार्टअप थे लेकिन आज देश में बढ़कर 70 हजार स्टार्टअप हो चुके हैं। जिनमें अकेेले कोरोना काल में ही दस हजार स्टार्टअप बने हैं। 44 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं की ओर से चलाए जाते हैं। जिससे महिलाएं भी देश के विकास में अपना योगदान कर सकती हैं। यह इस बात का परिचायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जटिल से जटिल समस्याओं को चुटकी भर में समाप्त कर दिया। इसमें चाहे देश को आर्थिक क्षेत्र में 11वें नंबर से पांचवें नंबर पर लाना हो या फिर 370 हटाना हो। देश की सीमाओं को सुरक्षित करना हो। देश में आए दिन आतंकी हमले करने वाले पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से सबक सिखाने जैसे काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए हैं।




100 युवाओं को बाबा रामदेव ने दी संन्यास दीक्षा
पतंजलि संन्यास आश्रम में संन्यास दीक्षा महोत्सव में आज रामनवमी के अवसर पर स्वामी रामदेव ने 100 युवाओं को संन्यास की दीक्षा दी। वीआईपी घाट पर दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया। महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि आरएसएस प्रमुख मोहन पहुंचे हैं। साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी महोत्सव में पहुंचे और यज्ञ में भाग लिया। उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन भी किया। योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा यह दूसरा संन्यास दीक्षा कार्यक्रम है। इसमें 60 बालकों और 40 बालिकाओं को सन्यास दीक्षा व 500 लोगों को ब्रह्मचर्य दीक्षा दी गई।
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि काफी समय से हरिद्वार आते रहे हैं। संघ प्रचारक होने के नाते हरिद्वार में बैठकों में आना पड़ता था। देश की परिस्थितयां आज जैसे हैं पहले उससे बहुत ही खराब थी। चिंता होती थी। हम भी एक संकल्प लेकर चले लेकिन तब ऐसा वातारण नहीं था। मन के अंदर की चिंता और ऊपर से गर्मी में तपने पर गंगा माता को नमन कर जल में बैठ जाते थे। गंगा के प्रवाह को देखकर मन को सुकून मिलता था। फिर जाकर काम पर लग जाते थे। आज उसी प्रवाह के साथ युवा संन्यासियों की साक्षात अनुभूति हो गई है। मन पूर्णता आश्वास्त हो गया। कहा कि संन्यास दीक्षा लेने वालों से बड़ा त्याग उनके माता-पिता का है। जिन्होंने पाल-पोसकर देश, धर्म, संस्कृति और मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। 

नई पीढ़ी के लोग हाथ में कंकड़ बांधकर आगे बढ़ रहे हैं। धर्म, संस्कृति के लिए खुद को समर्पित कर रहे हैं। भागवत ने कहा कि युवा संन्यासियों को उसी शरीर में एक नया रूप मिला है। शरीर, बुद्धि और व्यक्तित्व की सारी मर्यादाओं से ऊपर उठकर परमात्मा को अपने में स्थापित करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संन्यास की दीक्षा लेने वाले युवाओं ने समाज, राष्ट्र, मानवता की सेवा का जो दृढ़ संकल्प लिया है वह सत्य और शिव संकल्प है। इसलिए परमात्मा सदैव उनके साथ है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि संन्यास मर्यादा, वेद, गुरु और शास्त्र की मर्यादा में रहते हुए नव संन्यासी बड़े संकल्प के लिए प्रतिबद्ध हो रहे हैं। ब्रह्मचर्य से सीधे संन्यास में प्रवेश करना सबसे बरी वीरता है। संन्यासियों के रूप में अपने ऋषियों के उत्तराधिकारियों को भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर रहे हैं। कहा कि संन्यासी होना जीवन का सबसे बड़ा गौरव है। सभी 100 संन्यासी ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए मातृभूमि, ईश्वरीय सत्ता, ऋषिसत्ता और अध्यात्म सत्ता में जीवन व्यतीत करेंगे। उन्होंने कहा कि नारायणी सेना तैयार की है, जो पूरे विश्व में संन्यास धर्म, सनातन धर्म व युगधर्म की ध्वजवाहक होगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि सभी एषणाओं, अविवेकपूर्ण कामनाओं एवं विषय वासनाओं और भोगों से मुक्त रहकर संन्यासी होना सबसे बड़ा उत्तरदायित्व है। एक संन्यासी के लिए गुरुनिष्ठा, कर्तव्यनिष्ठा एवं ध्येयनिष्ठा में निरन्तरता बनाए रखना ही जीवन का प्रयोजन होना चाहिए।

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