Thursday, 29 October 2026

सरकारी कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यावहारिक और एकरूप बनाने के लिए शासन ने सभी विभागों से स्थानांतरण अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों का विस्तृत विश्लेषण कर स्पष्ट प्रस्ताव मांगे गए हैं।



उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यावहारिक और एकरूप बनाने के लिए शासन ने सभी विभागों से स्थानांतरण अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों का विस्तृत विश्लेषण कर स्पष्ट प्रस्ताव मांगे गए हैं।
अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत ने 28 अक्टूबर को इस संबंध में सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

शासन के अनुसार, उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 में कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए विस्तृत प्रक्रिया और समय-सारिणी निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य स्थानांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता, वस्तुनिष्ठता और एकरूपता सुनिश्चित करना है।
हालांकि, वार्षिक स्थानांतरण सत्र के दौरान विभिन्न विभागों में अधिनियम के कुछ प्रावधानों और धाराओं के व्यावहारिक क्रियान्वयन में कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

अपर सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि अलग-अलग विभागों की संवर्गीय संरचना, तकनीकी एवं विशिष्ट प्रकृति के पदों की उपलब्धता तथा सुगम और दुर्गम क्षेत्रों में पदों के असमान वितरण के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा सेवा अवधि की गणना और अधिनियम की विभिन्न धाराओं के निर्वचन को लेकर भी समस्याएं सामने आती हैं।

इन परिस्थितियों में कुछ विभाग कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से मार्गदर्शन, छूट अथवा शिथिलीकरण के प्रस्ताव भेज रहे हैं। शासन का मानना है कि ऐसे प्रस्तावों से न केवल स्थानांतरण प्रक्रिया की समयबद्धता प्रभावित होती है, बल्कि नीति में एकरूपता बनाए रखने में भी व्यावहारिक जटिलताएं उत्पन्न होती हैं।

स्थायी समाधान के लिए मांगे सुझाव

शासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के क्रियान्वयन में आ रही वास्तविक समस्याओं का गहन विश्लेषण करें। यदि अधिनियम की किसी धारा अथवा उपधारा के तहत स्थानांतरण में नीतिगत, विधिक या संवर्गीय बाधा उत्पन्न हो रही है, तो उसके स्थायी समाधान के लिए आवश्यक संशोधन या स्पष्टीकरण का स्पष्ट और औचित्यपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया जाए।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावों में केवल उन्हीं कठिनाइयों को शामिल किया जाए, जो अधिनियम के प्रावधानों की संरचनात्मक अथवा विधिक बाध्यता के कारण उत्पन्न हो रही हैं। व्यक्तिगत प्रकरणों या तात्कालिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं से संबंधित मामलों को इसमें शामिल नहीं किया जाए।

शासन का उद्देश्य स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना, अनावश्यक प्रशासनिक पत्राचार कम करना और सभी विभागों में अधिनियम का एकरूपता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसके लिए विभागों से समयसीमा के भीतर ठोस सुझाव मांगे गए हैं।



 

No comments:

Post a Comment