Friday, 12 June 2026

Jaspal Rana: खेल जगत का सितारा, सियासत का भी रहा चेहरा, विश्व रिकॉर्ड से चुनावी मैदान तक ऐसा रहा सफर


महज 18 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को चौंकाने वाले निशानेबाज जसपाल राणा का इतनी जल्दी दुनिया से चला जाना खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है। खेल के मैदान में देश को गौरवान्वित करने के साथ ही उन्होंने राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल कर दिया। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में जीते गए उनके तीन स्वर्ण पदक आज भी भारतीय खेल इतिहास की यादगार उपलब्धियों में गिने जाते हैं।

खेल के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान वह कांग्रेस के स्टार प्रचारक के रूप में भी नजर आए।

हाल के वर्षों में वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्य कर रहे थे और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। खेल और सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व बनाती है।

1995 कामनवेल्थ गेम्स में आठ गोल्ड पदक जीतकर बने थे गोल्डन ब्वाय। यह उस समय किसी भी भारतीय निशानेबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।

Jaspal Rana passes away journey in sports and politics athletes like Manu Bhaker gave to the nation
जसपाल राणा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने 102 डिग्री बुखार के बावजूद प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और तीन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। यह कीर्तिमान आज तक कोई निशानेबाज नहीं तोड़ पाया है।
हाल ही में म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप के दौरान उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद दिल्ली के अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी भी हुई थी। वे रिकवर हो रहे थे, लेकिन  अचानक आए इस दुखद मोड़ ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया।

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