Saturday, 25 April 2026

जनगणना में बाधा डाली तो तीन साल तक जेल, डिजिटल होगी जनगणना 2027, दो चरणों में होगा आयोजन


सरकार ने जनगणना 2027 को लेकर महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। इस आदेश के अनुसार इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। इसमें प्रदेश के नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिये गये हैं। जनगणना का पहला चरण 16 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिसमें हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना के साथ स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। स्व-गणना की प्रक्रिया हाउस लिस्टिंग से पहले 15 दिनों की अवधि में पूरी की जाएगी। दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में आयोजित होगी, जबकि बर्फबारी वाले क्षेत्रों में यह कार्य सितंबर 2026 में ही संपन्न कराया जाएगा। राज्य सरकार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरा सहयोग दें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं।

सरकार के अनुसार जनगणना के आंकड़े गांव और शहर स्तर तक आवास, सुविधाएं, जनसंख्या, साक्षरता, धर्म, रोजगार, प्रवासन और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं की जानकारी का प्रमुख स्रोत होते हैं। इन आंकड़ों का उपयोग नीतियों के निर्माण, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन और आरक्षण तय करने में भी किया जाता है। अधिसूचना में जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत नागरिकों के लिए पूछे गए प्रश्नों का सही उत्तर देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। साथ ही, घर या परिसर में जनगणना अधिकारियों को प्रवेश की अनुमति देना भी जरूरी है।

गलत जानकारी देने, कार्य में बाधा डालने या नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान रखा गया है। इस अभियान में सहयोग के कर्तव्य का पालन न करना या बाधा उत्पन्न करना, लापरवाही बरतना, गलत जानकारी देना या उत्तर देने से इनकार करना, जनगणना अधिकारी को प्रवेश न देना, घर पर लगाए गए चिन्ह/संख्या को हटाना या नुकसान पहुंचाना, विवरण प्रपत्र न भरना या गलत जानकारी देना और जनगणना कार्यालय में अवैध प्रवेश करने जैसे मामलों में एक हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है तथा कुछ मामलों में तीन वर्ष तक का कारावास भी हो सकता है।

जनगणना डाक्यूमेंट का निरीक्षण कोई नहीं करेगा

अधिसूचना में मुख्य सविच ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से जुड़े सभी अभिलेख गोपनीय रहेंगे और उन्हें किसी भी सामान्य कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा। जनगणना से संबंधित किसी भी अभिलेख, रजिस्टर या प्रपत्र का निरीक्षण किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकेगा। ये अभिलेख किसी भी दीवानी या आपराधिक कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होंगे, सिवाय उन मामलों के जो इस अधिनियम के अंतर्गत आते हैं। हर व्यक्ति जो किसी घर, परिसर, नाव या अन्य स्थान पर रहता है, वह जनगणना अधिकारी को आवश्यकतानुसार प्रवेश की अनुमति देगा तथा आवश्यक चिन्ह/संख्या अंकित करने की अनुमति देगा।

—राजेश

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