Friday, 13 March 2026

CBSE Result 2026: री-चेकिंग से बढ़ ही जाएंगे बोर्ड एग्जाम के मार्क्स? सीबीएसई अधिकारी ने साफ-साफ बताया


सीबीएसई 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में इस बार करीब 50 लाख से अधिक स्टूडेंट्स बैठे हैं। सीबीएसई 10वीं क्लास की परीक्षाएं 11 मार्च 2026 को खत्म हो चुकी हैं, जबकि 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाएं 10 अप्रैल 2026 तक चलेंगी। बोर्ड परीक्षा के बाद बहुत से छात्र अपने नंबरों से खुश नहीं रहते। ऐसे छात्रों को बोर्ड री-चेकिंग की सुविधा देता है।


हालांकि इस बार बोर्ड 12वीं क्लास की कॉपी चेकिंग में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) लागू करेगा, जिससे 12वीं के छात्रों को री-चेकिंग या री-इवैल्यूएशन का मौका मिलने की उम्मीद नहीं है।
छात्रों को कॉपी री-चेकिंग के लिए करीब 5 दिन मिलते हैं। लेकिन बहुत से छात्रों और उनके अभिभावकों को लगता है कि री-चेकिंग से मार्क्स बढ़ ही जाएंगे। इसपर सीबीएसई बोर्ड एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज द्वारा दी गई जानकारी काम आ सकती है। सबसे पहले री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया समझते हैं।

CBSE बोर्ड एग्जाम की कॉपी री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया क्या है?

सीबीएसई की 2025 की गाइडलाइन के हिसाब से कॉपी चेकिंग की क्वालिटी बनाए रखने के बाद, रिजल्ट तैयार किया जाता है। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का इस्तेमाल किया गया। फिर भी, अगर स्टूडेंट्स अपने इवैल्यूएशन/रिजल्ट से खुश नहीं हैं, तो उन्हें मार्क्स के वेरिफिकेशन, उनकी इवैल्यूएट की गई आंसर बुक की फोटोकॉपी लेने और उनके आंसर के री-इवैल्यूएशन की सुविधा दी जाती है। इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स से रिक्वेस्ट है कि अप्लाई करने से पहले गाइडलाइंस को ध्यान से पढ़ें ताकि बाद में किसी भी परेशानी से बचा जा सके।

कॉपी री-चेकिंग के लिए छात्रों को सबसे पहले स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करना होता है। RTI अधिनियम-2005 के तहत उत्तर पुस्तिका (पुस्तिकाओं) की फोटोकॉपी, RTI अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुसार प्रदान की जाएगी। हालांकि, RTI अधिनियम के तहत अंकों के सत्यापन और/या री-इवैल्यूएशन के लिए अनुरोध नहीं किया जा सकता है और ऐसे अनुरोधों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके बाद मार्क्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके मुख्य तौर पर तीन स्टेप होते हैं।
I. स्कैन कॉपी या आंसर शीट्स की कॉपी के लिए आवेदन करना।
II. मार्क्स वेरिफिकेशन
III. री-इवैल्यूएशन या री-चेकिंग

I. आंसर शीट की फोटो या स्कैन कॉपी लेना

  • सबसे पहले छात्र सीबीएसई के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आंसर शीट मांगने के लिए अप्लाई करना होता है। सभी प्रक्रियाओं के लिए रिक्वेस्ट केवल ऑनलाइन और तय शेड्यूल के दौरान, प्रोसेसिंग फीस के साथ ही स्वीकार की जाएंगी। तय तारीख और समय के बाद और ऑफलाइन मोड में कोई भी एप्लीकेशन स्वीकार नहीं की जाएगी।
  • प्रोसेसिंग फीस 500/- प्रति विषय है। केवल ऑनलाइन (क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट बैंकिंग) ही जमा की जा सकती है। प्रोसेसिंग फीस पोस्टल ऑर्डर/DD/मनी ऑर्डर/चेक/कैश वगैरह के ज़रिए स्वीकार नहीं की जाएगी।
  • अधूरी/ऑफलाइन/बिना फीस वाली एप्लीकेशन बिना किसी पत्राचार के सीधे तौर पर खारिज कर दी जाएंगी।
  • ऑनलाइन प्रक्रिया में हर कैंडिडेट के लिए हर स्टेप के लिए केवल एक ही एप्लीकेशन स्वीकार की जाएगी। कैंडिडेट को पहले ही यह तय कर लेना होगा कि उसे एक विषय के लिए अप्लाई करना है या कई विषयों के लिए। एक बार अप्लाई करने के बाद, दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा।
  • मार्क्स में बदलाव या प्रक्रिया में देरी के कारण होने वाले किसी भी परिणाम के लिए बोर्ड जिम्मेदार नहीं होगा, यदि कारण उसके नियंत्रण से बाहर हैं।
  • एक भी मार्क कम होने पर भी उसे लागू किया जाएगा।
  • ऐसे मामलों में, जहां मार्क्स में बदलाव होता है (चाहे बढ़ोतरी हो या कमी), ऐसे कैंडिडेट्स को अपनी मौजूद मार्कशीट-कम-सर्टिफिकेट सरेंडर करना होगा। उसके बाद, उन्हें बदले हुए परफॉर्मेंस के साथ एक नई मार्कशीट-कम-सर्टिफिकेट जारी की जाएगी।
  • प्रोसेसिंग फीस वापस नहीं की जाएगी।

II. मार्क्स का वेरिफिकेशन

अगर स्टूडेंट को लगता है कि कॉपी चेकिंग में कोई गलती है या टोटलिंग में गलती है या कोई उत्तर जांचा नहीं गया है और अपने मार्क्स से खुश नहीं हैं तो वह वेरिफिकशन ऑफ मार्क्स के लिए अप्लाई कर सकता है। इस प्रक्रिया में चेक किया जाएगा कि सभी प्रश्नों के नंबर जोड़े गए या नहीं, किसी प्रश्न को गलती से बिना चेक किए छोड़ा तो नहीं गया और टोटलिंग में कोई गलती तो नहीं हुई।

III. री-इवैल्यूएशन या री-चेकिंग

मार्क्स वेरिफिकेशन के बाद रिजल्ट री-इवैल्यूएशन राउंड से गुजरता है। इसका रिजल्ट छात्र के उसी लॉगिन अकाउंट में बताया जाता है जिससे उसने वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था। मार्क्स में बदलाव होने की स्थिति में, पहली सूचना कि अंक बदल गए हैं (अंकों में वृद्धि/कमी), अपलोड/होस्ट की जाएगी। उसके बाद, एक बार परिणाम की फिर से गणना हो जाने पर, अंकों में हुई वास्तविक बढ़ोतरी या वास्तविक कमी भी अपलोड/होस्ट की जाएगी।

पुनर्मूल्यांकन/चुनौती के लिए अनुरोध केवल थ्योरी पार्ट (theory portion) के लिए ही स्वीकार किया जाएगा, जिसकी फीस ₹100 प्रति प्रश्न होगी। आवेदक को संबंधित विषय की अंकन योजना (marking scheme) देखनी होगी, जो प्रश्न पत्र के साथ वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। इसके बाद, उम्मीदवार स्पष्ट और उचित कारणों के साथ, आवश्यक प्रश्न (प्रश्नों) के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं। मार्क्स में एक अंक की भी कमी होने पर, उसे लागू किया जाएगा। री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट फाइनल होगा। री-इवैल्यूएशन के खिलाफ किसी भी अपील या समीक्षा पर विचार नहीं किया जाएगा।

क्या री-चेकिंग के बाद मार्क्स बढ़ ही जाएंगे?

सीबीएसई बोर्ड एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज ने एक वीडियो में इसका जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा बिलकुल नहीं है कि अगर रिजल्ट री-इवैल्यूएशन के समय दिया जाए और मार्क्स बढ़ ही जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि अगर आप अप्लाई करेंगे तो आपके मार्क्स बढ़ेंगे ही बढ़ेंगे। आपके मार्क्स कम भी हो सकते हैं। यह पूरी तरह से स्टूडेंट के पेपर पर निर्भर रहता है।

री-इवैल्यूएशन के बाद कौन-से मार्क्स वेलिड होंगे?

नहीं, सीबीएसई अधिकारी ने आगे बताया था कि री-इवैल्यूएशन के बाद मार्क्स कम होने की वजह से बहुत से पेरेंट्स हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि आप हमारे बच्चे के पहले वाले मार्क्स ही रखें, कम हुए मार्क्स हटा दीजिए। इस पर अधिकारी बताते हैं कि यह नियम के खिलाफ है। एक बार री-इवैल्यूएशन के बाद जो फाइनल मार्क्स होंगे वही मान्य होंगे। चाहे वे बढ़े हुए हों या फिर कम।

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