हाइब्रिड कक्षा क्या है और क्या यह शिक्षा का भविष्य है?
हाइब्रिड शिक्षण
मॉडल (प्रत्यक्ष और ऑनलाइन दोनों तरह से अध्ययन) को छात्रों, शिक्षकों
और अभिभावकों के बीच व्यापक प्राथमिकता मिली है और वे चाहते हैं कि कक्षाओं में
परंपरागत शिक्षण फिर से शुरू होने के बाद भी किसी न किसी रूप में ऑनलाइन पढ़ाई भी
जारी रहे. एचपी इंडिया के एक सर्वे में यह तथ्य उभरकर सामने आया है. कोविड-19 महामारी
प्रौद्योगिकी के जरिये शिक्षण को भारत समेत दुनियाभर में अपनाने के लिहाज से एक
अवसर साबित हुई है. शिक्षा में अवरोध न आ सके इसलिए कई ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन होने
लगीं।
आज से कुछ साल
पहले पढ़ाई का सिर्फ एक तरीका होता था। जिसे हम पारंपरिक शिक्षा पद्धति के नाम से
जानते थे। जँहा किताबों से भरे हुए बस्ते,एक विषय
के लिए, एक अध्यापक होते थे। पढ़ाई के लिए अध्यापक और
किताबे ही हमारा एक मात्र विकल्प हुआ करती थी। अगर हमे समझ न भी आए तो इन्ही संसाधनों पर निर्भर रहना होता था।
परंतु समय तथा तकनीकी ने बहुत कुछ बदल दिया है। आज की शिक्षा पारंपरिक नीतियों में
आधुनिक तकनीकीओ का मिश्रण कर एक नया रूप प्रस्तुत कर दिया है। जो सीखने तथा सिखाने के बहुत विकल्पों
को जोड़ दिया है। इसी जोड़ वाले विकल्प को हाइब्रिड /Blended
learning के रूप में हमारे सामने आया है।
हाइब्रिड
कक्षा क्या है ?
हाइब्रिड /Blended
learning जिसे
हिंदी में हम मिश्रित शिक्षा प्रणाली कहते हैं। यह वह पद्धति है, जहां
हम पारंपरिक शिक्षा के साथ डिजिटल संसाधनों जैसे ऑडियो,वीडियो, ग्राफिक, प्रोजेक्टर,सॉफ्टवेयर,वेब
आदि अन्य उपकरणों का समावेश करके एक ऐसी पद्धति का आविष्कार करते हैं। जो शिक्षा
को रोचक तथा आसान बना देता है। यह
मिश्रण होती है पारंपरिक शिक्षा तथा ऑनलाइन शिक्षा पद्धति का। पारंपरिक शिक्षा तथा
ऑनलाइन शिक्षा पद्धति का मिश्रित रूप Hybrid/Blended
learning कहा जाता
है।
यह वह प्रक्रिया
है जिसमें पारंपरिक शिक्षा के गुणों जैसे शिक्षक और विद्यार्थी का भौतिक जगह पर
रूबरू होकर कंप्यूटर तथा वेब समर्थित शिक्षा, उपकरणों
के माध्यम से कक्षा का संचालन करना Blended learning कहलाता
है। इसे हम hybrid
learning (हाइब्राइड लर्निंग) भी कह सकते हैं। जिसमें एक से अधिक पद्धतियों का
समावेश होता है। कहने का मतलब कक्षा में टीचर की उपस्थिति हो और समझाने के लिए
किताबो के अलावा ऑडियो, वीडिओ तथा अन्य चीजों की भी सहायता ली
जाए।
अब
प्रश्न यह उठता है कि यह ऑनलाइन लर्निंग से कैसे अलग है ?
क्योंकि यहां पर
भी हम डिजिटल तकनीकीओ का उपयोग कर रहे हैं। तो दोस्तों ऑनलाइन लर्निंग में किसी भी
समय कहीं पर भी पढ़ाई की जाती है। परंतु
मिश्रित पद्धति मैं
हम समय सीमा के अंदर पारंपरिक नीतियों के द्वारा, अनुशासन
का अनुकरण करके इस पद्धति को अपनाते हैं। जिसमें हम सामाजिक नियमों के साथ
स्वास्थ्य को भी केंद्रित करके इस पद्धति का संचालन करते हैं।
इसमें सबसे
अच्छी बात यह है कि इस पद्धति के द्वारा विद्यार्थियों का असेसमेंट के जरिए नजर रख
सकते हैं कि वह ऑडियो या वीडियो या अन्य चीजों को देख रहा है या नहीं या फिर वह
दिए गए कार्यों को समझ रहा है या नहीं? मिश्रित पद्धति के द्वारा इस पर हम ध्यान रख
सकते है।
मिश्रित पद्धति का
विभाजन 5 भागों में किया गया है।
- रूबरू संचालन- इसमें शिक्षक अपना लेक्चर डिजिटल माध्यमों से देता है।
- नियमित आवर्तन- इसमें विद्यार्थी कक्षा में रूबरू संचालन के द्वारा स्वयं अध्ययन करके पढ़ाई करता है।
- फ्लेक्स- इसमें शिक्षकों का सिर्फ योगदान और सलाह देना होता है, इसमें विद्यार्थी संपूर्ण अध्ययन इंटरनेट तथा डिजिटल संसाधनों का प्रयोग करके करता है।
- स्वतः ब्लेंड- इसमें शिक्षार्थी खुद की अपनी सोच अपनी जरूरतों अपनी प्रेरणा से अपने पढ़ाई की सामग्री को ऑनलाइन साधनों के द्वारा पूरा करता है।
- ऑनलाइन संचालन- इसमें संपूर्ण पाठ्यक्रम ऑनलाइन संसाधनों के द्वारा ही पढ़ाया जाता है।
मिश्रित पद्धति की
विशेषता-
- यह पारंपरिक शिक्षा तथा ऑनलाइन शिक्षा के मुकाबले अधिक प्रभावशाली है।
- इसमें सहयोगी शिक्षात्मक अनुभव तथा सामाजिक तत्वों के सभी गुणों का समावेश होता है।
- विद्यार्थियों के लिए अनुसार अनुशासनात्मक शिक्षा तथा संतोष जैसे गुणों का समावेश होता है।
- तकनीकी के उपयोग के द्वारा अध्यापक तथा छात्रों के बहुमुखी विकास होता है।
- इसमें विद्यार्थी अपने शिक्षा की समझ का गुणात्मक तथा मात्रात्मक मूल्य को कंप्यूटर के आधार पर कर सकते हैं।
- इसमें समय तथा एनर्जी की भी बचत होती है।
- इसमें रोचकता बनी रहती है।
क्या हाईब्रिड स्कूली शिक्षा परम्परागत शिक्षा को बदल सकती है ?
महामारी की
अचानक शुरुआत ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को एक संकर शिक्षा प्रणाली अपनाने
के लिए मजबूर कर दिया है ताकि छात्रों को अध्ययन कार्यक्रमों तक निरंतर और निर्बाध
पहुंच प्राप्त हो सके। हाइब्रिड शिक्षा ने निश्चित रूप से समावेशी और समान शिक्षा
की सुगमता को बढ़ाया है, लेकिन यह
बच्चे के सामाजिक, सांस्कृतिक
और भावनात्मक विकास की गारंटी नहीं दे सकता है। कक्षा में सीखना छात्रों को
आमने-सामने संचार और सहकर्मी से सहकर्मी गतिविधियों से प्रेरित रहने के लिए
प्रेरित करता है। इसके अलावा, स्कूल का
निर्धारित कार्यक्रम छात्रों के जीवन में अनुशासन और व्यवस्था को बढ़ाता है और
उन्हें रोमांचक समूह सीखने की तकनीकों के माध्यम से जोड़े रखता है। स्कूली शिक्षा
ऑनलाइन और ऑफलाइन सीखने का सही मिश्रण है, लेकिन
हर विषय को ऑनलाइन नहीं पढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, विज्ञान, खेल और
शारीरिक शिक्षा ऐसे विषय हैं जिन्हें अकेले डिजिटल रूप से नहीं पढ़ाया जा सकता है।
इन विषयों में अतिरिक्त एकाग्रता और ध्यान देने की आवश्यकता होती है, जो अच्छा है जब छात्र शिक्षक की उपस्थिति में सीख रहे हों। एक भौतिक
कक्षा सेटअप में, शिक्षक
बेहतर ढंग से पहचान सकते हैं कि क्या छात्रों ने अवधारणाओं को समझ लिया है या यदि
उन्हें अभी भी संदेह है। कक्षा शिक्षण छात्रों को चर्चा, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी
और स्वस्थ प्रतियोगिताओं जैसी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने विचारों, विचारों और अवधारणाओं को व्यक्त करने के लिए एक अधिक अनुकूल वातावरण
प्रदान करता है। साथ ही, शिक्षकों
के लिए अपने छात्रों की निगरानी करना और जुड़ाव के स्तर की जांच करना आसान है, जो आभासी सीखने के माहौल में एक बड़ी चुनौती बन गई है। छात्रों के घर
के कामों, पारिवारिक
समस्याओं, या पढ़ने
के लिए एक शांत जगह खोजने से विचलित होने की संभावना कम होती है।
मोबाइल फोन, टैबलेट और ऐप पर लगातार उत्तेजना के आदी छात्र आसानी से विचलित हो
जाते हैं और पर्यवेक्षण के बिना ऑनलाइन कक्षाओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते
हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना किसी नियम के विविध सामग्री भी गंभीर चिंता
का विषय है, क्योंकि
यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को आसानी से प्रभावित कर सकती है, उनके लिए अपमानजनक जटिलताएं पैदा कर सकती है और उनकी ध्यान केंद्रित
करने और सीखने की क्षमता को कम कर सकती है।
डिजिटल तकनीक
महंगी है, और भारत
जैसे देश में, जहां आय
के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में बहुत बड़ा अंतर है,
ऑनलाइन शिक्षा पर निर्भर रहना एक व्यवहार्य या कुशल विकल्प नहीं है।
इसके अलावा, ऑनलाइन
सीखने के लिए कक्षाओं के निर्बाध प्रवाह के लिए इंटरनेट और टैब, मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों में निवेश की आवश्यकता होती है।
हाइब्रिड लर्निंग एक बढ़िया दूसरा विकल्प है, लेकिन
पहला विकल्प बाद वाले को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर मिश्रित पद्धति एक बहुत ही रोचक पद्धिति है
शिक्षा के क्षेत्र में। जिससे विद्यार्थी को बहुमुखी प्रतिभावान बनने में सहायक
सिद्ध होगा। अतः स्कूल,शिक्षक तथा विधार्थी को इससे जुड़ना एक
सकारात्मक कदम साबित होगा।
धन्यवाद
Pradeep
Negi
Lecturer
– Economics
GIC
BHEL Haridwar

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