केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
बोर्ड ने कक्षा 10 के उत्तीर्ण मानदंडों (पासिंग क्राइटेरिया) में बड़ा संशोधन किया है, जो इसी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा। इसका प्रभाव प्रतापगढ़ में संचालित 50 स्कूलों पर भी पड़ेगा।
अप्रैल 2026 में सीबीएसई ने नोटिफिकेशन जारी करके बताया कि कक्षा 10 के उत्तीर्ण मानदंडों बदल रहे हैं। 12वीं में ये नियम पहले से था। 10वीं के लिए अब नया जोड़ा गया है। जिले में सीबीएसई के 50 विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 10 की मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है।
नए नियमों के तहत अब छात्रों को पास होने के लिए थ्योरी और आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) दोनों में अलग-अलग न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। अभी तक विद्यार्थियों को पास होने के लिए थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट मिलाकर कुल 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होते थे।
अब बोर्ड ने इसे दो अनिवार्य खंडों में बांट दिया है। पहला, थ्योरी यानी लिखित परीक्षा में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। दूसरा आंतरिक मूल्यांकन में प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल और असाइनमेंट में भी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होगा।
इसका सीधा अर्थ है कि यदि कोई छात्र इंटरनल में 90 प्रतिशत अंक लाता है, लेकिन थ्योरी में 32 प्रतिशत रह जाता है, तो उसे फेल माना जाएगा। यही नियम इंटरनल पर भी लागू होगा।
यह है नई गाइडलाइन
- छात्र: अब सिर्फ रटने से काम नहीं चलेगा। प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल को गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि यहां मिली असफलता पूरे साल के परिणाम को प्रभावित करेगी।
- शिक्षक: थ्योरी के साथ-साथ कक्षा की गतिविधियों और निरंतर मूल्यांकन पर अधिक ध्यान देना होगा। यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र हर स्तर पर अवधारणाओं को समझें।
- अभिभावक: बच्चों पर केवल बोर्ड परीक्षा के दौरान दबाव बनाने के बजाय, पूरे साल उनके प्रदर्शन और स्कूल गतिविधियों पर नजर रखनी होगी।
- स्कूल: शैक्षणिक योजना में थ्योरी और प्रैक्टिकल का उचित संतुलन बनाना होगा और आंतरिक मूल्यांकन की पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
यह कदम नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल अंतिम परीक्षा के भरोसे बैठने के बजाए पूरे साल नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित करना है। इससे सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की प्रासंगिकता बढ़ेगी और छात्रों की रचनात्मकता व व्यावहारिक ज्ञान में सुधार होगा।

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