Friday, 6 March 2026

NCERT ने गणित के सिलेबस में किया बड़ा बदलाव, अब बच्चे इस क्लास में ही पढ़ेंगे अर्थमेटिक व ज्योमेट्रिक प्रोग्रेशन


 राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई 2023) के आधार पर कक्षा आठवीं तक का नया पाठ्यक्रम जारी करने के बाद अब कक्षा नौवीं के लिए संशोधित ड्राफ्ट पाठ्यक्रम जारी किया है।

इसमें विज्ञान के साथ ही गणित सहित अन्य विषयों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। गणित में एप्लीकेशन यानी अनुप्रयोग और तार्किक सोच पर अधिक जोर दिया गया है। इसमें गणित को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़ने और बीजगणितीय सोच विकसित करने पर जोर दिया गया है।

विद्यार्थियों को पहले कक्षा 10वीं और 11वीं में पढ़ाया जाने वाले अरिथमेटिक प्रोग्रेशन (एपी) और ज्योमेट्रिक प्रोग्रेशन (जेपी) जैसे टापिक अब कक्षा नौवीं में ही पढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा फाइनेंशियल मैथ्स के माध्यम से वृद्धि और क्षय के पैटर्न और प्रायिकता यानी प्रोबेबिलिटी पर एक अलग अध्याय जोड़ा गया है।

एनसीईआरटी की ओर से जारी इस पाठ्यक्रम को सत्र 2026-27 में लागू किया जाना है। कक्षा नौ के गणित पाठ्यक्रम में कुल 15 अध्याय होंगे। गणित विषय में उक्त बदलावों के साथ ही कंस्ट्रक्शन्स व पैरललोग्राम और त्रिभुज के क्षेत्रफल से जुड़े अध्याय हटाए गए हैं। हालांकि संख्या पद्धति, बहुपद, निर्देशांक ज्यामिति, त्रिभुज, चतुर्भुज, वृत्त, हेरान का सूत्र, पृष्ठीय क्षेत्रफल व आयतन और सांख्यिकी जैसे प्रमुख विषय पाठ्यक्रम का हिस्सा बने हुए हैं।

गणित को बताया गया ‘सार्वभौमिक भाषा’
नई पाठ्यचर्या में गणित को ‘सार्वभौमिक भाषा’ बताया गया है, जो तर्क और रीजनिंग के माध्यम से दुनिया को समझने का माध्यम बनती है। इसमें संख्याएं, आकृतियां, पैटर्न और उनके संबंधों के अध्ययन के जरिए विद्यार्थियों को प्रकृति, तकनीक और दैनिक जीवन की अनेक प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है।

पाठ्यक्रम के अनुसार गणित केवल सैद्धांतिक विषय नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों की प्रगति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। एनसीएफ-एसई 2023 के अनुसार गणितीय ज्ञान क्रमिक रूप से विकसित होता है, जिसमें प्रत्येक नई अवधारणा पहले से सीखी गई जानकारी पर आधारित होती है।

अन्य विज्ञानों के विपरीत गणित में सत्यता का आधार तर्क और प्रमाण होता है, न कि प्रयोग और अवलोकन। गणित अमूर्त (एब्सट्रैक्ट) अवधारणाओं पर आधारित होता है, लेकिन इन्हीं अवधारणाओं के माध्यम से राकेट की गति, भवन निर्माण की डिजाइन और तकनीकी माडलिंग जैसे वास्तविक जीवन के कार्य समझे जाते हैं।

यह बताए गए हैं गणित पढ़ाने के प्रमुख उद्देश्य
-विद्यार्थियों में तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना
-समस्या समाधान क्षमता को मजबूत करना
-गणितीय विचारों को सही भाषा और प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त करने की क्षमता विकसित करना
-गणित के प्रति रुचि और सराहना पैदा करना
-गणित को वास्तविक जीवन और अन्य विषयों से जोड़ना
-विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सटीकता और अनुशासन विकसित करना

अभ्यास को दी गई है केंद्रीय भूमिका
सीबीएसई के डिप्टी सिटी कोआर्डिनेटर व गणित विषय के शिक्षक रहे बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल गोपाल दीक्षित के अनुसार नई पाठ्यचर्या में स्पष्ट किया गया है कि गणित में अभ्यास (प्रैक्टिस) अत्यंत महत्वपूर्ण है। नियमित और उद्देश्यपूर्ण अभ्यास से विद्यार्थियों में गणना की दक्षता, समस्या समाधान क्षमता और आत्मविश्वास विकसित होता है।

पाठ्यक्रम में यह भी कहा गया है कि अभ्यास केवल अधिक प्रश्न हल करने तक सीमित न रहे, बल्कि समझ के साथ किया गया विविध और उद्देश्यपूर्ण अभ्यास ही प्रभावी होगा। इसके साथ ही गणित को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, कला और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों से जोड़कर पढ़ाने पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि विद्यार्थी वास्तविक जीवन की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।

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