भारतीय सर्राफा बाजार में आज एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आया जिसने निवेशकों और आम आदमी, दोनों को हैरत में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, सोने की कीमतें ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने के लिए बेताब हैं, वहीं चांदी ने ₹3.34 लाख प्रति किलो का सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भू-राजनीतिक तनाव और रुपये की कमजोरी के चलते निवेशकों का रुझान तेजी से बुलियन की ओर बढ़ा है, जिससे कीमतों में यह अभूतपूर्व उछाल आया है।
कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल: क्या कहते हैं आंकड़े?
- 'ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन' के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को बाजार में भारी खरीदारी देखी गई।
- सोना: 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 6,500 रुपये (4.24%) की छलांग लगाकर 1,59,700 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। गौरतलब है कि मंगलवार को ही इसने पहली बार 1.5 लाख का स्तर पार किया था।
- चांदी: चांदी की चमक और तेज हो गई है। लगातार नौवें दिन तेजी दिखाते हुए यह 11,300 रुपये महंगी होकर 3,34,300 रुपये प्रति किलोग्राम (कर सहित) के स्तर पर पहुंच गई।
क्या है सर्राफा बाजार में लगातार तेजी का करण?
कीमतों में इस विस्फोट के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों कारण जिम्मेदार हैं। आइए इस बारे में जानें।
1. रुपये की कमजोरी और सप्लाई का संकट
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी के अनुसार, घरेलू बाजार में टाइट सप्लाई और मजबूत निवेश मांग के कारण कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों की तुलना में अधिक तेज हैं। इसके अलावा, कमजोर रुपया भी आग में घी का काम कर रहा है। रुपया भी रुपया 91.69 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।
2. अमेरिका-ईयू तनाव और 'ग्रीनलैंड' मुद्दा
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक प्रवीण सिंह बताते हैं कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच तनाव बढ़ गया है। इसके साथ ही राजकोषीय और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं ने भी सोने की कीमतों को हवा दी है।
3. दावोस और 'रिसोर्स नेशनलिज्म'
ऑगमोंट की हेड-रिसर्च रेनीषा चेनानी के मुताबिक, निवेशक दावोस की घटनाओं पर नजर गड़ाए हुए हैं, जहां डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ का मुद्दा उठाने की आशंका है। प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ रहे 'रिसोर्स नेशनलिज्म' और नाटो सहयोगियों के प्रति अमेरिकी रुख ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है।
वैश्विक बाजार में सोने-चांदी का क्या भाव?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पैनिक बाइंग देखी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सोने ने पहली बार 4,800 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार किया और 4,888.46 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। भू-राजनीतिक जोखिम और मैक्रो इकोनॉमिक अनिश्चितता को देखते हुए सोने की कीमतें अपनी रैली जारी रख सकती हैं और जल्द ही 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती हैं। निवेशक शेयर बाजार और करेंसी की अस्थिरता से बचने के लिए सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, कीमतों में नरमी की उम्मीद कम ही है।

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